मोहब्बत का
मारा......दिल ये बेचारा !
मुझे क्या फरक मैं
तो हूँ ही अवारा !!
तुम चलो मेरे साथ
यूँ भी किसी दिन ,
दिल की तंग गलियों
में जैसे हो कोई बंजारा !!
कहो भी न कुछ
..........न रहो ऐसे चुप ,
गाते चलो कुदरत की
मौजों के संग मेरे यारा !!
दिल की कशमकश में
खोया रहा मैं सदा ही
औ मिल ही गया मुझको
मेरा प्रीतम ये प्यारा !!